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Bihar Monsoon Session: अंतिम दिन विधानसभा में हंगामे के आसार, छात्र आंदोलन के बीच सत्ता-विपक्ष आमने-सामने

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Alam Ki Khabar: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन छात्र आंदोलन, NEET पेपर लीक, CAG रिपोर्ट और पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

पटना, 24 जुलाई। आलम की खबर: बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र का पांचवां और अंतिम दिन राजनीतिक हलचल और विरोध-प्रदर्शन के बीच शुरू हुआ। छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि में विधानसभा परिसर की सुरक्षा बढ़ाई गई, जबकि सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई विधायक अपनी गाड़ियों से पार्टी के झंडे हटाकर सदन पहुंचे। विधानसभा परिसर में विपक्षी सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर तख्तियां हाथ में लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रारंभिक कार्यवाही के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने प्रश्नकाल स्थगित कर दिया।

सदन के बाहर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज रही। सत्ता पक्ष ने विपक्ष की रणनीति और सदन में उपस्थिति को लेकर सवाल उठाए, जबकि विपक्ष ने छात्र आंदोलन, NEET पेपर लीक, पुलिस कार्रवाई और जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास किया।

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सदन में विपक्ष की भूमिका जनता देख रही है और अंतिम निर्णय जनता ही करेगी। उन्होंने हाल के प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होना स्वाभाविक है और ऐसे लोगों को छात्र नहीं कहा जा सकता।

दूसरी ओर, राजद विधायक अनीता देवी ने विपक्ष का पक्ष रखते हुए कहा कि किसी एक नेता की उपस्थिति को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। उनके अनुसार विपक्ष जनता के मुद्दों को पूरी मजबूती से उठाता रहेगा और सरकार से जवाब मांगता रहेगा।

इस बीच माकपा विधायक अजय कुमार विधानसभा परिसर में पोस्टर लेकर पहुंचे। उन्होंने भूमिहीन परिवारों को पांच डिसमिल जमीन, जरूरतमंदों को पक्का आवास और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप किसानों को फसलों का लाभकारी मूल्य देने की मांग उठाई। साथ ही उन्होंने छात्र प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि लोकतांत्रिक विरोध का सम्मान किया जाना चाहिए।

सत्र के अंतिम दिन सदन के भीतर और बाहर NEET पेपर लीक, छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई, CAG रिपोर्ट और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर तीखी बहस होने के आसार हैं। सत्ता पक्ष जहां अपनी उपलब्धियां और विकास कार्यों का पक्ष रख रहा है, वहीं विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर कायम है।

मानसून सत्र के समापन दिवस पर विधानसभा परिसर का माहौल पूरी तरह राजनीतिक रंग में नजर आया। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सदन की कार्यवाही किन निष्कर्षों के साथ समाप्त होती है और उठाए गए मुद्दों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधानसभा बहस और जवाबदेही का सबसे बड़ा मंच होती है। ऐसे में जनहित से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा और सकारात्मक समाधान की दिशा में पहल होना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। राजनीतिक टकराव के साथ-साथ जनता की अपेक्षाओं को भी केंद्र में रखना समय की मांग है।

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